राज़ी_कला_अंतरिक्ष
When They Look Down: A Quiet Reflection on Gaze, Identity, and the Weight of Beauty
वो देखते हैं… और हँसते नहीं! 😅
ये काला सिल्क बॉडीसूट? सिर्फ़ फैशन नहीं — कामकाया का मंदिर है।
गुप्ता का प्रश्न: “इसकी समझ में क्या है?”
जवानी पर मुड़कर पढ़ने की कोशिश में…
उसकी आँखें नीचे झुकती हैं — पर सबकुछ प्रश्न है।
“आपला सबकुछ”?
अगल-1200% प्राइवेट सबकुछ!
अभिवास में एमएफटि: INFP (भावनात्मक), अधिकार: सिलेंट (चुपचुप)।
हमलोग देखते हैं… पर जवानी कभी नहीं!
आपलोग क्या समझते हैं? 💭👇
The Quiet Power of a Forgotten Silhouette: When Chino Elegance Meets Minimalist Light
इस तस्वीर में कोई मुस्कान नहीं… पर सच्चाई बहुत ज़्यादा है! \n\nकला के इस फोटो में ‘शायद’ का मतलब है? \n\nआपने कभी सोचा कि ‘एक सिल्हूवो’ के पैरों के नीचे खड़े-सिल्क पर ‘छाया’ है? \n\nजब मौसम पर ‘छिनो एलिगेंस’ का समय होता है… \n\nऔर ‘फेमिनलिस्ट लाइट’ सिर्फ़ ‘शहद’ में होती है? \n\nये तस्वीर ‘माँ’ का प्रशंसा है… \n\n‘बेटा’, ‘बहन’, ‘बुढ़िया’, ‘ग्राम’ — सबकुछ… \n\nइनमें ‘प्रशंस’ भी है! \n\ncomment section mein batao kyun? 😌
She Stands in the Light, Yet Sees No One: A Quiet Portrait of Asian Femininity in Minimalist Silence
वो तो चुप्पी में खड़ी, पर कोई नहीं देखता! 😅
ये फोटोग्राफ़ किसके सामने है? क्या किसी के हाथ में कैमरा है? नहीं…ये तो सिर्फ़ सायरी के पल्लू में सांस है — पलटते हुए सिर्फ़ ‘छाया’।
कल्कुलेटर से ‘लाइक’ माँगना? पढ़िए!
इसमें ‘शटर’ का पॉज़् है — ‘साइ’ से पहले।
अब सवाल: आपके Gharib में ‘शबद’ कितना है? और ‘सिर्फ़’…कभी-कभी ‘खुद’ है?
#फ्रेम_ऑफ_थ_चुप्पी #जबद_ऑफ_थ_चुप्पी
Личное представление
मैं दिल्ली की एक चुपचुप आँख हूँ, जो सिर्फ़ प्रकाश को नहीं, बल्कि आत्मा के साये को पकड़ती हूँ। मेरी हर तस्वीर एक सन्नाटा कविता है ——जहाँ सब कुछ सुनाई जाती है, पर कोई सवाल नहीं पूछता। मेरे कलम में सिर्फ़ पश्चिमी महिलाओं के मुद्रा हैं: पगड़ियों के प्रति, सजदा के समय, मेहनगम के अभिमन। मैंने हज़ारों पलटेंगें...और सबसे पहला, मुझसे...अभिप्रेम।



